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Tuesday, May 08, 2018

खून से लथपथ कश्मीर को कैसे बचाएं?

अपनी नैसर्गिक सुंदरता के लिए विख्यात एक घाटी जैसे ख़ून से लथपथ है, वहां के नौजवानों के हाथों में पत्थर और उनकी आंखों में गुस्सा है. उनके घरों के पिछवाड़े में अपनों की लाशें दफ़्न हैं.
कश्मीरी आतंकवाद से लड़ते हमारे सुरक्षा बलों का काम जैसे ख़त्म ही नहीं हो रहा. हमारी एजेंसियां एक लिस्ट बनाती हैं, उसे ख़त्म करती हैं, दूसरी तैयार हो जाती है. यह एक डरावना दृश्य है. अपनी नैसर्गिक सुंदरता के लिए विख्यात एक घाटी जैसे ख़ून से लथपथ है, वहां के नौजवानों के हाथों में पत्थर और उनकी आंखों में गुस्सा है. उनके घरों के पिछवाड़े में अपनों की लाशें दफ़्न हैं.

यह सिलसिला बुरहान वानी के मारे जाने के बाद से तेज़ हुआ है. बीच के वर्षों में कश्मीर रास्ते पर लौटता लग रहा था. पर्यटन का कारोबार फिर फूल-फल रहा था. नौजवान आतंकी रास्तों से वापस आते नज़र आ रहे थे. यह कहा जा रहा था कि कश्मीर में माहौल बाहर वाले ख़राब कर रहे हैं. पाकिस्तान में बैठे लश्कर और जैश के घुसपैठिए कश्मीर में मारे जा रहे थे. लेकिन इस एक साल में हालात बदल गए हैं. आतंकवाद में स्थानीय नौजवानों की भागेदारी बढ़ी है. बल्कि  कल तक सड़कों पर चक्कर काटने वाले, पुलिस बल में काम करने वाले और विश्वविद्यालयों में पढ़ाने वाले अचानक दहशतगर्द बन रहे हैं और सुरक्षा बलों की गोली खाकर मारे जा रहे हैं.

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